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WHAT IS THE काव्यम ?
काव्यम the poet association

हम सब भारतीय संस्कृति के पुजारी हैं और हमारी पौराणिक संस्कृति में यह मान्यता है कि हर व्यक्ति के ऊपर कुछ ऋण होते हैं,जिन्हें पूरा करने के लिए व्यक्ति को प्रयास करने चाहिए।

…काव्यम the poet association

काव्यम (The Poet Association) इसी भाव की परिणति है। इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गजेंद्र सोलंकी जी का शुरुआत से ऐसा मत रहा कि जिस कवि सम्मेलनीय जगत से पैसा,प्रतिष्ठा और देश-विदेशों में इतना यश और सम्मान अर्जित हुआ,उसकी बेहतरी, शुचिता,रचनाधर्मिता और मौलिकता को संरक्षित एवं आगे बढ़ाने हेतु हर रचनाकार का कर्तव्य है कि वह अपना सार्थक योगदान दे,

भारत वर्ष प्रतिभा और संभावनाओं से भरा हुआ राष्ट्र है, जहां एक से बढ़कर एक प्रतिभाओं ने अपनी चेतना,ऊर्जा और विशेष प्रयास से राष्ट्र को गौरवान्वित करने का समय-समय पर कार्य किया है। इन मौलिक एवं सहज प्रतिभाओं को एक मंच पे लाने, उन्हें उचित अवसर देने एवं परंपरा की भलाई हेतु अनेकों साहित्यिक संस्थाओं ने समय-समय पर अपना योगदान भी दिया है। काव्यम का गठन संस्था की दृष्टि से नहीं अपितु एक परिवार की दृष्टि से किया गया है,जिसका उद्देश्य कविता,मंचीय शुचिता एवं श्रेष्ठ रचनाकारों के श्रेष्ठ विचारों, मौलिक सृजन एवं सकारात्मक सोच के साथ एक परिवार की भांति प्रतिभाओं को स्वस्थ माहौल प्रदान कर काव्य परंपरा की गरिमा को आगे ले जाना है। यह कार्य बिना आप सभी साहित्य-साधकों के सहयोग,सकारात्मक प्रयास एवं शुभकामनाओं के बिना संभव नहीं है। इसीलिए काव्यम (The Poet Association) आप सभी साहित्य -साधकों से सार्थक सहयोग की आकांक्षा करती है।आइए हम सब मिलकर मंचीय परम्परा की भलाई हेतु अपना भी योगदान सुनिश्चित करें।
काव्यम परिवार ने जुड़ने वाले किसी भी कवि या साहित्यप्रेमी से आर्थिक सहयोग की बाध्यता न रखते हुए इस विषय को स्वविवेक पर छोड़ा है, परिवार से जुड़े हर सदस्य का दृढ़ मत है कि हर कवि,साहित्यकार या किसी भी क्षेत्र से जुड़े हुए कलाकार के स्वाभिमान का सम्मान सर्वप्रथम सुनिश्चित होना चाहिए, जिस दिशा में काव्यम the poet association पूरी निष्ठा से कार्य करने का प्रयत्न करेगी।

हमारे भारतवर्ष या कहें आर्यावर्त की सभ्यता, संस्कृति अध्यात्म से ओतप्रोत, ईश्वरीय परमसत्ता में विश्वास रखने वाली प्रकृतिवादी संस्कृति रही है। नदियों, ऋतुओं एवं कवियों-कविताओं की संस्कृति है। हम सब इसी भारतीय संस्कृति के पुजारी हैं और हमारी पौराणिक संस्कृति में यह मान्यता है कि हर व्यक्ति के ऊपर कुछ ऋण होते हैं,जिन्हें पूरा करने के लिए व्यक्ति को प्रयास करने चाहिए। काव्यम The Poet’s Association इसी भाव की परिणति है । इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गजेंद्र सोलंकी जी का शुरुआत से ऐसा मत रहा कि जिस कवि सम्मेलनीय जगत से पैसा, प्रतिष्ठा और देश-विदेशों में इतना यश और सम्मान अर्जित हुआ,उसकी बेहतरी, शुचिता,रचनाधर्मिता और मौलिकता को संरक्षित एवं आगे बढ़ाने हेतु हर रचनाकार का कर्तव्य है कि वह अपना सार्थक योगदान दे।
वेदों, पुराणों, उपनिषदों, रामायण, श्रीमदभगवद्गीता सहित संस्कृत,प्राकृत,हिंदी आदि अनेक भारतीय भाषाओं में रचित काव्य साहित्य का अनंत भंडार इस बात का प्रमाण है कि कवियों ने युगों से अपने लौकिक, आलौकिक सृजन से लोक जन चेतना को सींचने के साथ-साथ साहित्यिक सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक प्रवाह के किनारे बाँधने का भागीरथ कार्य किया है। वर्तमान में बदलते परिवेश में भी कविता की सार्थकता सर्वविदित है । किसी भी मौलिक कवि अथवा कलाकार की प्रतिभा प्रकृति एवं ईश्वर प्रदत्त होती है जिसे देशकाल परिस्थितियाँ तराशती रहती हैं । ऐसे कवियों, कलाकारों की प्रतिभा का संरक्षण,संवर्धन कवि-साहित्यिक समाज अथवा किसी भी क्षेत्र से संबंधित समृद्ध, समर्थ, सक्षम महानुभावो का नैतिक कर्तव्य होना चाहिए ताकि काव्य का प्रवाह जनमानस अर्थात मानव मन की रसमयता को निरंतर बनाये रख सके ।

‘काव्यम’ का गठन संस्था की दृष्टि से नहीं अपितु एक काव्य परिवार की दृष्टि से किया गया है,जिसका उद्देश्य कविता, मंचीय शुचिता एवं श्रेष्ठ रचनाकारों के श्रेष्ठ विचारों, मौलिक सृजन एवं सकारात्मक सोच के साथ एक परिवार की भांति प्रतिभाओं को स्वस्थ वातावरण प्रदान कर काव्य परंपरा की गरिमा को आगे ले जाना है। यह कार्य बिना आप सभी साहित्य-साधकों के सहयोग, सकारात्मक प्रयास एवं शुभकामनाओं के बिना संभव नहीं है। इसीलिए काव्यम The Poet’s Association आप सभी काव्य साहित्य के साधकों से सार्थक सहयोग की आकांक्षा करती है। आइए हम सब मिलकर मंचीय परम्परा की भलाई हेतु अपना भी योगदान सुनिश्चित करें। ‘काव्यम’ परिवार ने जुड़ने वाले किसी भी कवि या साहित्यप्रेमी से आर्थिक सहयोग की बाध्यता न रखते हुए इस विषय को स्वविवेक पर छोड़ा है, परिवार से जुड़े हर सदस्य का दृढ़ मत है कि हर कवि, साहित्यकार या किसी भी क्षेत्र से जुड़े हुए कलाकार के स्वाभिमान का सम्मान सर्वप्रथम सुनिश्चित होना चाहिए, जिस दिशा में काव्यम The Poet’s Association पूरी निष्ठा, समर्पण, पारदर्शिता एवं निरपेक्ष भाव से कार्य करने का प्रयत्न करेगी।शेष आप सभी का सहयोग और सार्थक सुझाव समय-समय पर हमें मार्गदर्शित करता रहेगा,ऐसा हमारा दृढ विश्वास है.

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