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काव्य ऋषि श्रद्धेय गोपालदास ‘नीरज’ जी को विनम्र काव्य श्रद्धांजलि – गजेंद्र सोलंकी

काव्य ऋषि श्रद्धेय गोपालदास ‘नीरज’ जी को विनम्र काव्य श्रद्धांजलि –

हो गए मौन गंधर्व गीत
वे गए छोड़ सब लोक मीत
चिर निद्रा में सो गया संत
इक कविता युग का हुआ अंत
पर अंतर में अहसास अमर
युग युग तक मन महकाओगे
तुम याद बहुत ही आओगे…..

यश का पावन अमृत पीकर
किंवदंती सा जीवन जीकर
संस्मरणों के ज्यों लोकगीत
सारी दुनियाँ का हृदय जीत
तुम अक्षर का पर्याय हुए
नश्वरता से यशकाय हुए
हे ! काव्य लोक के यायावर
अब फिर कब अलख जगाओगे
तुम याद सदा ही आओगे…..

गजेंद्र सोलंकी

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