अधिवेशन
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अधिवेशन का समय २८ जुलाई ११ बजे

Delhi

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काव्यम का गठन एक परिवार की दृष्टि से किया गया है, जिसका उद्देश्य कविता,मंचीय शुचिता है।

काव्यम परिवार ने जुड़ने वाले किसी भी कवि या साहित्यप्रेमी से आर्थिक सहयोग की बाध्यता न रखते हुए इस विषय को स्वविवेक पर छोड़ा है, परिवार से जुड़े हर सदस्य का दृढ़ मत है कि हर कवि,साहित्यकार या किसी भी क्षेत्र से जुड़े हुए कलाकार के स्वाभिमान का सम्मान सर्वप्रथम सुनिश्चित होना चाहिए, जिस दिशा में काव्यम (The Poet Association) पूरी निष्ठा से कार्य करने का प्रयत्न करेगी।

हमारे भारतवर्ष या कहें आर्यावर्त की सभ्यता, संस्कृति अध्यात्म से ओतप्रोत, ईश्वरीय परमसत्ता में विश्वास रखने वाली प्रकृतिवादी संस्कृति रही है।
Kavyam
Mission

उद्देश्य कविता,मंचीय शुचिता एवं श्रेष्ठ रचनाकारों के श्रेष्ठ विचारों, मौलिक सृजन एवं सकारात्मक सोच के साथ काव्य परंपरा की गरिमा को आगे ले जाना है।

About
Beliefs

हम सब भारतीय संस्कृति के पुजारी हैं और हमारी पौराणिक संस्कृति में यह मान्यता है कि हर व्यक्ति के ऊपर कुछ ऋण होते हैं, जिन्हें पूरा करने  को  प्रयास करने चाहिए।

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काव्यम आप सभी साहित्य – साधकों से सार्थक सहयोग की आकांक्षा करती है। आइए हम सब मिलकर मंचीय परम्परा की भलाई हेतु अपना भी योगदान सुनिश्चित करें।

OUR MISSION

‘काव्यम’ का गठन संस्था की दृष्टि से नहीं अपितु एक काव्य परिवार की दृष्टि से किया गया है,जिसका उद्देश्य कविता, मंचीय शुचिता एवं श्रेष्ठ रचनाकारों के श्रेष्ठ विचारों, मौलिक सृजन एवं सकारात्मक सोच के साथ एक परिवार की भांति प्रतिभाओं को स्वस्थ वातावरण प्रदान कर काव्य परंपरा की गरिमा को आगे ले जाना है।.

भारत वर्ष प्रतिभा और संभावनाओं से भरा हुआ राष्ट्र है, जहां एक से बढ़कर एक प्रतिभाओं ने अपनी चेतना,ऊर्जा और विशेष प्रयास से राष्ट्र को गौरवान्वित करने का समय-समय पर कार्य किया है। आइए हम सब मिलकर मंचीय परम्परा की भलाई हेतु अपना भी योगदान सुनिश्चित करें।

काव्यम परिवार ने जुड़ने वाले किसी भी कवि या साहित्यप्रेमी से आर्थिक सहयोग की बाध्यता न रखते हुए इस विषय को स्वविवेक पर छोड़ा है, परिवार से जुड़े हर सदस्य का दृढ़ मत है कि हर कवि, साहित्यकार, कलाकार के स्वाभिमान का सम्मान सर्वप्रथम सुनिश्चित होना चाहिए 

काव्यम (The Poet Association) पौराणिक संस्कृति भाव की परिणति है।  कवि सम्मेलनीय जगत से पैसा,प्रतिष्ठा और देश-विदेशों में इतना यश और सम्मान अर्जित हुआ,उसकी बेहतरी, शुचिता,रचनाधर्मिता और मौलिकता को संरक्षित एवं आगे बढ़ाने हेतु हर रचनाकार का कर्तव्य है कि वह अपना सार्थक योगदान दे, 

वेदों, पुराणों, उपनिषदों, रामायण, श्रीमदभगवद्गीता सहित संस्कृत,प्राकृत,हिंदी आदि काव्य साहित्य का अनंत भंडार इस बात का प्रमाण है कि कवियों ने युगों से अपने लौकिक, आलौकिक सृजन से लोक जन चेतना को सींचने के साथ-साथ साहित्यिक सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक प्रवाह के किनारे बाँधने का भागीरथ कार्य किया है।

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